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बरवाडीह-चिरमिरी रेल परियोजना पिछले 100 वर्षो से अधर मे लटकी हुई है।देश की आजादी के बाद कई सासद इस क्षेत्र से चुनकर गए लेकिन किसी ने इस परियोजना को मंजिल दिखाने का काम नही किया।

पलामू के पूर्व सांसद जोरावर राम ने इस मुदे को लेकर डालटनगंज मेदिनीनगर मे धारणा भी दिये थे लेकिन कुछ नही हुआ।

पूर्व मे तीन बिहार के रेल मंत्रियो ने भी इस योजना को पूरा करने का आशवासन दिया था लेकिन किया कुछ नही।

बतादे कि चिरमिरी सेअंबिका पुर (छत्तीसगढ)तक रेल मार्ग का निर्माण हो चुका है।अब सिर्फ अंबिकापुर से बरवाडीह तक लगभग 150 किलोमीटर तक रेल मार्ग निर्माण किया जाना है। इसके बन जाने से कोलकता व मुंबई के बीच की दुरी कम होगी। वही बरवाडीह को जकसन का दर्जा भी मिल जायेगा ।तथा झारखंड व छत्तीसगढ के कोयला भंडारो का विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

1925 मे अंग्रेजी हुकुमत ने हजारी बाग से सिगरौली तक रेल। लाइन बिछाने की योजना बनाई थी। इसके। तहद बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गयाथा।

अग्रेजो की ओर से शुरू किया गया यह काम आजादी। के बाद 1954-55 तक चला । बाद मे यह बंद करा दिया गया।

इस मार्ग पर पडने वाला सबसे बडी नदी उतरी कोयल पर बरवाडीह के पुल के पीलर का निर्माण लगभग पूराहो चुका था जो अब भी खडे है।इसके अतिरिक्त सभी छोटे बडे नालो पर पुल पुलियि का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गयाथा।

प्रस्तावित स्टेशनो पर कार्यालय व कर्म चारियो के आवासो का निर्माण भी अतिम चरण मे था जो वर्तमान मे भवन खडहर हो चुकाहै।

वर्तमान सासंद पलामू बिस्णु दयाल राम (B D राम)एव चतरा सासंद श्री कालीचरण सिंह से पलामू, गढवा ,लातेहार की जनता आशा रखती है कि ये बहुत पराना बरवाडीह-चिरमिरी रेल परियोजना अवश्य जल्द पुरा करायेगे ।

न्यूज LIGHT भारत TV

अवश्य हम पूछेंगे

सुरेश कमलापुरी सम्पादक जर्नलिस्ट झारखंड सह लातेहार जिलाके उप समन्वयक गायत्री परिवार ।

न्यूज LIGHT भारत TV की प्रस्तुती।

2जून 2025

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